फ़्रेटबोर्ड का गणितीय सिद्धांत और 12 सुरों का विभाजन
संगीत के भौतिकी सिद्धांत के अनुसार जब किसी कंपायमान तार की प्रभावी लंबाई आधी कर दी जाती है, तो उसकी आवृत्ति दोगुनी हो जाती है और हमें एक सप्तक ऊपर का वही स्वर प्राप्त होता है। आधुनिक वाद्य यंत्रों में एक सप्तक को 12 समान भागों में बाँटने के लिए सम-स्वभाव यानी इक्वल टेम्परमेंट प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसका अर्थ है कि हर अगले अर्धस्वर की दूरी 2 के 12वें मूल के अनुपात पर निर्भर करती है।
नट से किसी भी विशिष्ट फ़्रेट की सैद्धांतिक दूरी ज्ञात करने का मानक सूत्र इस प्रकार है:
यहाँ कुल स्केल लेंथ को दर्शाता है, फ़्रेट की संख्या है और नट से उस फ़्रेट की दूरी है। इस गणितीय नियम के कारण 12वां फ़्रेट हमेशा कुल स्केल लेंथ के ठीक आधे हिस्से पर स्थित होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी गिटार की स्केल लेंथ 648 mm है, तो उसका 12वां फ़्रेट ठीक 324 mm पर आएगा।