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गिटार कॉर्ड फाइंडर: डायग्राम और ऑडियो प्लेबैक

किसी भी रूट नोट और प्रकार के लिए गिटार कॉर्ड डायग्राम देखें, ओपन व बार कॉर्ड सीखें और रियल ऑडियो स्ट्रमिन्ग के साथ धुन सुनें।

Mehmet Demiray (मेहमत देमिराय) प्रकाशित अपडेट किया गया
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डायग्राम तुरंत अपडेट होते हैं; हर वॉयसिंग सुनने के लिए बजाएं पर टैप करें
C
ओपन शेप
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बैरे शेप · 3fr
3
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बैरे शेप · 8fr
8

चार्ट पढ़ना: वर्टिकल लाइनें तार हैं (बाईं ओर मोटा E तार), X का मतलब है तार न बजाएं, O का मतलब है खुला तार बजाएं, और बिंदु उंगलियों की जगह दिखाते हैं।

गोल बार का मतलब है कि एक उंगली उस फ्रेट के सभी तारों को दबाती है; ग्रिड के पास का छोटा नंबर शुरुआती फ्रेट बताता है।

दोनों डायग्राम अलग-अलग पोजीशन में एक ही कॉर्ड हैं: बैरे वर्जन एक जाने-पहचाने शेप को फ्रेटबोर्ड पर आगे ले जाता है, इसीलिए पांच ओपन शेप सीखने से हर स्केल बज सकता है।

कॉर्ड डायग्राम पढ़ने की सरल विधि

गिटार सीखने की शुरुआत में कॉर्ड डायग्राम को समझना सबसे बुनियादी कदम है। गिटार कॉर्ड फाइंडर में प्रदर्शित डायग्राम गिटार के फ्रेटबोर्ड का सीधा दृश्य प्रस्तुत करते हैं। इसमें छह लंबवत यानी खड़ी रेखाएं गिटार के छह तारों को दर्शाती हैं। बाईं ओर की सबसे पहली रेखा छठी तार (सबसे मोटी E तार) होती है और दाईं ओर की अंतिम रेखा पहली तार (सबसे पतली E तार) होती है। क्षैतिज यानी आड़ी रेखाएं फ्रेट वायर को दर्शाती हैं।

डायग्राम के शीर्ष पर दो तरह के संकेत दिखाई देते हैं। 'O' का अर्थ है ओपन स्ट्रिंग, जिसका मतलब है कि उस तार पर कोई उंगली रखे बिना उसे खुले रूप में बजाना है। 'X' का अर्थ है म्यूट स्ट्रिंग, यानी उस तार को या तो बजाना नहीं है या उंगली के हल्के स्पर्श से शांत रखना है। फ्रेटबोर्ड पर बने काले बिंदु उन स्थानों को दर्शाते हैं जहां उंगलियों से तार को दबाना होता है। जब एक ही फ्रेट पर कई तारों के आर-पार एक ठोस पट्टी दिखाई दे, तो उसे बार (Barre) कहा जाता है। यदि कोई कॉर्ड फ्रेटबोर्ड पर नीचे की ओर बजाया जा रहा हो, तो डायग्राम के बगल में शुरुआती फ्रेट संख्या जैसे फ्रेट 1 या फ्रेट 3 लिखी होती है।

ओपन शेप और बार कॉर्ड की समानता

गिटार पर ओपन कॉर्ड और बार कॉर्ड वास्तव में अलग नहीं हैं, बल्कि वे एक ही बुनियादी आकार के चलायमान (Movable) रूप हैं। पश्चिमी संगीत की CAGED प्रणाली के अनुसार, ओपन E या ओपन A जैसे आकारों को फ्रेटबोर्ड पर आगे खिसकाकर किसी भी रूट नोट का कॉर्ड बनाया जा सकता है। जब आपकी तर्जनी उंगली नट (Nut) का स्थान ले लेती है, तो वही ओपन शेप बार कॉर्ड बन जाता है।

किसी ओपन शेप को फ्रेटबोर्ड पर स्थानांतरित करने का गणितीय सूत्र इस प्रकार है:

n=(रूटशेप रूट)mod12n = (\text{रूट} - \text{शेप रूट}) \bmod 12

यहाँ nn उस फ्रेट की संख्या है जिस पर बार लगाया जाएगा। उदाहरण के लिए, F मेजर का कोई प्राकृतिक ओपन आकार नहीं होता, इसलिए यह फ्रेट 1 पर E-शेप को बार करके बजाया जाता है। इसी तरह B माइनर कॉर्ड फ्रेट 2 पर A माइनर के आकार को बार करके बनता है। Bb मेजर को फ्रेट 1 पर A-शेप से या फ्रेट 6 पर E-शेप से बजाया जा सकता है। गिटार कॉर्ड फाइंडर दोनों विकल्प दिखाता है ताकि आप अपनी गायकी की रेंज या गाने के प्रवाह के अनुसार सही पोज़ीशन चुन सकें। यदि आप किसी गाने के स्केल को बदलना चाहते हैं, तो ट्रांसपोज़ और कैपो कैलकुलेटर की मदद से सही फ्रेट चुन सकते हैं।

प्रमुख कॉर्ड परिवार और उनका संगीत में उपयोग

गिटार में प्रत्येक कॉर्ड परिवार का अपना एक विशिष्ट भाव और संगीतमय चरित्र होता है। गिटार कॉर्ड फाइंडर आपको विभिन्न कॉर्ड श्रेणियों को सुनने और अभ्यास करने की सुविधा देता है।

  • मेजर (Major): यह कॉर्ड ध्वनि में उज्ज्वल, स्थिर और सकारात्मक महसूस होता है। भारतीय सुगम संगीत और बॉलीवुड गीतों में इसका सबसे अधिक प्रयोग होता है।
  • माइनर (Minor): यह कॉर्ड गहरा, भावुक और थोड़ा उदास स्वर देता है। गज़ल, सूफी और धीमी गति के गीतों में माइनर कॉर्ड्स रीढ़ की हड्डी की तरह होते हैं।
  • पावर कॉर्ड (Power / 5): इसमें केवल रूट और पांचवां स्वर होता है, इसलिए इसमें न तो मेजर का भाव होता है और न माइनर का। इसका उपयोग रॉक और मेटल संगीत में डिस्टॉर्शन के साथ किया जाता है।
  • सेवंथ कॉर्ड्स (7, m7, maj7): डोमिनेंट 7th कॉर्ड में हल्का तनाव होता है जो वापस रूट पर लौटने की इच्छा पैदा करता है। Maj7 स्वप्निल और जैज़ी ध्वनि देता है, जबकि m7 बेहद शांत और आधुनिक पॉप जैसा अहसास कराता है।
  • सस्पेंडेड कॉर्ड्स (sus2, sus4): Dsus2 और Dsus4 कॉर्ड D मेजर से केवल एक-एक नोट के अंतर पर होते हैं। ये कॉर्ड गाने में एक अस्थायी तनाव उत्पन्न करते हैं जो वापस मेजर कॉर्ड पर जाकर ही शांत होता है।

साफ ध्वनि निकालने के लिए सही तकनीक

गिटार पर कॉर्ड पकड़ते समय तारों से साफ और स्पष्ट ध्वनि आना नियमित अभ्यास और सही उंगली पोज़ीशन पर निर्भर करता है। जब भी आप किसी फ्रेट पर उंगली रखें, तो उंगली के पोरों (Fingertips) का उपयोग करें और उंगली को फ्रेट वायर के ठीक पीछे रखें। यदि उंगली फ्रेट से बहुत पीछे होगी तो तार में झनझनाहट (Buzz) होगी।

बार कॉर्ड बजाते समय अपने अंगूठे को गिटार की गर्दन के पिछले हिस्से के बीच में रखें। इससे आपकी हथेली और उंगलियों को पर्याप्त खिंचाव और ताकत मिलती है। तर्जनी उंगली को बिल्कुल सीधा रखने के बजाय थोड़ा सा साइड की ओर घुमाएं, जहां हड्डी सख्त होती है। इसके अलावा, जिन तारों पर 'X' का निशान है, उन्हें बगल वाली उंगली के हल्के स्पर्श से म्यूट रखें ताकि स्ट्रम करते समय अवांछित स्वर न गूंजें। साफ आवाज़ के लिए यह भी आवश्यक है कि आपका गिटार सही मानक पिच पर ट्यून हो, जिसे आप ऑनलाइन गिटार ट्यूनर से जांच सकते हैं।

गिटार के तारों की मानक आवृत्ति निम्नलिखित भौतिक सूत्र का पालन करती है:

f=440×2(m69)/12f = 440 \times 2^{(m-69)/12}

यहाँ mm उस स्वर का मिडी (MIDI) नंबर है। सही ट्यूनिंग और सटीक उंगली दबाव से ही हर नोट सही आवृत्ति पर गूंजता है।

शुरुआती अभ्यास में होने वाली सामान्य गलतियां

गिटार सीखते समय शुरुआती विद्यार्थी कुछ ऐसी सामान्य गलतियां करते हैं जिनसे उनकी प्रगति धीमी हो जाती है। इन गलतियों को समय रहते सुधारना आवश्यक है।

  1. फ्रेट वायर के ठीक ऊपर दबाना: कई शुरुआती वादक धातु के फ्रेट वायर के ऊपर ही उंगली रख देते हैं। इससे तार की कंपन रुक जाती है और ध्वनि दब जाती है। हमेशा फ्रेट वायर के ठीक पीछे थोड़ा सा स्थान छोड़कर दबाव बनाएं।
  2. बार उंगली का मुड़ जाना: बार कॉर्ड लगाते समय तर्जनी उंगली के पोर ढीले पड़ जाते हैं, जिससे बीच की तारें बजना बंद हो जाती हैं। उंगली को सीधा और दृढ़ रखें।
  3. म्यूट तारों को भी स्ट्रम करना: जिन तारों पर 'X' लगा हो, उन्हें स्ट्रम करने से पूरा कॉर्ड बेसुरा लगने लगता है। केवल निर्दिष्ट तारों पर ही स्ट्रम चलाएं।
  4. F कॉर्ड पर जल्दी हार मान लेना: फ्रेट 1 पर F मेजर बजाना हर गिटार वादक के लिए पहली बड़ी चुनौती होती है क्योंकि नट के पास तारों का तनाव सबसे अधिक होता है। रोज़ाना 5 से 10 मिनट का लक्षित अभ्यास करने पर यह कॉर्ड कुछ ही हफ्तों में साफ बजने लगता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।

कुछ कॉर्ड्स जैसे F major या B minor का ओपन रूप क्यों नहीं होता?

गिटार के मानक ट्यूनिंग में खुले तारों के सुर हर कॉर्ड की बुनियादी संरचना में फिट नहीं बैठते। F major में F, A, और C सुर होते हैं, जिन्हें खुले तारों के साथ बिना बार बनाए बजाना संभव नहीं है। इसलिए F major को फ्रेट 1 पर E-शेप बार कॉर्ड के रूप में और B minor को फ्रेट 2 पर Am-शेप बार कॉर्ड के रूप में बजाया जाता है।

बार कॉर्ड्स (Barre Chords) बजाते समय तारों से साफ आवाज़ कैसे निकालें?

अपनी तर्जनी उंगली को फ्रेट वायर के ठीक पीछे रखें और उंगली के सपाट हिस्से के बजाय उसके हल्के किनारे वाले हिस्से से दबाव बनाएं। अपने अंगूठे को गिटार की गर्दन के पीछे बीच में रखें ताकि उंगलियों को पर्याप्त सहारा मिले। यदि कुछ तार दबने से छूट रहे हैं या बज रहे हैं, तो उंगली को थोड़ा ऊपर या नीचे खिसकाकर सही स्थिति तय करें।

शुरुआती गिटार वादकों को सबसे पहले कौन से कॉर्ड्स सीखने चाहिए?

शुरुआती गिटार वादकों को सबसे पहले बुनियादी ओपन कॉर्ड्स सीखने चाहिए जैसे C major, G major, D major, E major, A major, E minor, और A minor। ये आकार बजाने में आसान होते हैं और उंगलियों में ताकत व लचीलापन विकसित करने में मदद करते हैं। इन बुनियादी आकारों पर महारत हासिल करने के बाद बार कॉर्ड्स सीखना काफी सरल हो जाता है।

एक ही कॉर्ड गिटार फ्रेटबोर्ड पर दो अलग फ्रेट्स पर क्यों दिखाई देता है?

गिटार पर चलने वाले CAGED आकारों की वजह से एक ही कॉर्ड अलग फ्रेट्स पर अलग बनावट के साथ बजता है। उदाहरण के लिए Bb major को फ्रेट 1 पर A-शेप बार कॉर्ड के रूप में बजाया जा सकता है या फ्रेट 6 पर E-शेप बार कॉर्ड के रूप में। दोनों में सुर समान होते हैं, लेकिन उनकी टोन और फ्रेटबोर्ड स्थिति अलग होती है।

पावर कॉर्ड (Power Chord या 5) क्या है और यह मेजर या माइनर से कैसे अलग है?

पावर कॉर्ड में केवल दो सुर होते हैं: रूट (मूल सुर) और फिफ्थ (पांचवां सुर)। सामान्य कॉर्ड्स में तीसरा सुर तय करता है कि कॉर्ड मेजर है या माइनर, लेकिन पावर कॉर्ड में तीसरा सुर नहीं होता। इसी कारण पावर कॉर्ड तटस्थ ध्वनि देते हैं और रॉक संगीत में डिस्टॉर्शन के साथ बहुत साफ सुनाई देते हैं।

क्या गिटार कॉर्ड फाइंडर किसी भी ट्यूनिंग के कॉर्ड्स दिखा सकता है?

गिटार कॉर्ड फाइंडर मानक ट्यूनिंग (E-A-D-G-B-E) पर आधारित डायग्राम और ऑडियो प्रदान करता है। अभ्यास शुरू करने से पहले अपने गिटार को ऑनलाइन गिटार ट्यूनर से ट्यून कर लें। यदि आप किसी गाने के स्केल को अपनी आवाज़ के अनुसार बदलना चाहते हैं, तो ट्रांसपोज़ और कैपो कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं।